Direction: निम्नलिखित प्रश्नों में दिए गए अनुच्छेदों के पहले और अंतिम वाक्यों में क्रमशः (1) और (6) की संज्ञा दी गई है। इसके मध्यवर्ती वाक्यों को चार भागों में बांटकर (य),(र),(ल),(व) की संज्ञा दी गई है। ये चारों वाक्य व्यवस्थित क्रम में नहीं है। इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित कदम चुनिए, जिससे सही अनुच्छेद का निर्माण हो।
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(1) अनुभूति के द्वंद ही से प्राणों के जीवन का आरंभ होता है।
(य) पेट कब भरा और खाली रहना ही ऐसी अनुभूति के लिए पर्याप्त होता है।
(र) बच्चे के छोटे से हृदय में पहले सुख और दुःख का सामान्य अनुभूति भरने के लिए जगह होती है।
(ल) जीवन के आरंभ में इन्हीं दोनों के चिन्ह हंसना और रोना देखे जाते हैं।
(व) उच्च प्राणी मनुष्य भी केवल एक जोड़ी अनुभूति लेकर संसार में आता है।
(6) यह अनुभूतियां बिल्कुल समान रुप में रहती हैं ; विशेष-विशेष विषयों की ओर विशेष-विशेष रूप में ज्ञानपूर्वक उन्मुख नहीं होती।
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- ल र य व
- व र य ल
- ल य र व
- य ल र व
- ल र य व
सही विकल्प: B
(1) अनुभूति के द्वंद ही से प्राणों के जीवन का आरंभ होता है। (व) उच्च प्राणी मनुष्य भी केवल एक जोड़ी अनुभूति लेकर संसार में आता है। (र) बच्चे के छोटे से हृदय में पहले सुख और दुःख का सामान्य अनुभूति भरने के लिए जगह होती है। (य) पेट कब भरा और खाली रहना ही ऐसी अनुभूति के लिए पर्याप्त होता है। (ल) जीवन के आरंभ में इन्हीं दोनों के चिन्ह हंसना और रोना देखे जाते हैं। (6) यह अनुभूतियां बिल्कुल समान रुप में रहती हैं ; विशेष-विशेष विषयों की ओर विशेष-विशेष रूप में ज्ञानपूर्वक उन्मुख नहीं होती।