Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यान पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। कुछ शब्द को मोटे अक्षरों में मुद्रित किया गया है, जिससे आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलेगी।
वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर पृथ्वी की जलवायु में होने वाले परिवर्तन चिंता का विषय बने हुए हैं। ये परिवर्तन पृथ्वी के भीतर होने वाली उथल-पुथल के कारण तो हो ही रहे हैं, पृथ्वीवासियों की ऐसी गतिविधियों के कारण भी हो रहे हैं, जो जलवायु पर असर डालती है। वास्तव में ग्रीन हाउस गैसों से भरी और अनियंत्रित उत्सर्जन से पृथ्वी गर्म हो रही है जिसे ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के नाम से जाना जाता है। इसका कारण बड़ी-बड़ी मिलों और फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला प्रदूषणकारी धुआँ है। इससे पृथ्वी की ओज़ोन परत को हानि पहुँच रही है। ग्रीन हाऊस गैसों का यह बेलगाम पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है और पृथ्वी पर जीवन के लिए गम्भीर समस्या बन चुका है।
पृथ्वी के भीतर की घटनाओं पर तो हमारा नियंत्रण नहीं है पर ऐसी गतिविधियों पर तो लगाम लगाई जा सकती है जो हमारे बस में है। इस गम्भीर खतरे का हल निकालने के लिए वैश्विक स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले बीस के बीच ग्रीन हाउस गैसों पर नियंत्रण कर भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के उपायों पर सहमति बनाना, जलवायु परिवर्तन पर के लिए कार्ययोजना का खाका तैयार करना तथा इन गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विकसित और विकासशील देशों के बीच लम्बी की रणनीति बनाना शमिल है। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम ‘क्योटो प्रोटोकोल’ है।
क्योटो प्रोटोकोल एक अन्तराष्ट्रीय है जिसका मुख्य लक्ष्य औद्योगिक देशों में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है। ग्लोबल वार्मिंग के लिए रूप से जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए किए गए इस करार में औद्योगिक देशों से ये प्रयास अपेक्षित हैं कि वे विकासशील देशों में इन गैंसों के उत्सर्जन से परियोजनाओं को बढ़ावा दें। इसके लिए वे उन योजनाओं को वित्त उपलब्ध कराएँ जो हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं करती हों। इस सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि उक्त प्रोटोकोल में ऐसे देशों को करने की व्यवस्था की गई है, जो एक अनुमत अधिकतम सीमा से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करते हैं। साथ ही, ऐसे देशों को लाभ पहुँचाने की व्यवस्था भी की गई है, जो वास्तव में इन गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने वाली परियोजनाओं में निवेश करते हैं।
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' क्योटो प्रोटोकोल ' का मुख्य उद्देश्य है
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- औद्योगिक देशों की बेलगाम ग्रीन हाउस गैसों के लिए उन्हें दंडित करना
- औद्योगिक देशों के ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर लगाम लगाना
- उन योजनाओं को वित्त उपलब्ध कराना जो हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं करतीं
- (B) और (C) दोनों
- इनमें से कोई नहीं
- औद्योगिक देशों की बेलगाम ग्रीन हाउस गैसों के लिए उन्हें दंडित करना
सही विकल्प: D
क्योटो प्रोटोकोल का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक देशों के ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर लगाम लगाना और उन योजनाओं को वित्त उपलब्ध कराना जो हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं करतीं।