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Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। कुछ शब्द को मोटे अक्षरों में मुद्रित किया गया है, जिससे आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलेगी।

हमलोग एक काल्पनिक दुनिया में जीते हैं। बचपन में सुनी गई कहानीयोंको ही हम वास्तविक जीवन का आधार मान लेते थे। बचपन में राजा-रानी की कहानी सुनते समय हम पहले ही अनुमान लगा लेते थे की रानी अत्यंत सुन्दर और राजा अत्यंत शक्तिशाली तथा बुद्धिमान होगा। एक दिन कोई भयंकर राक्षस आता है और रानी को अपहरण कर उन्हें किसी अज्ञात स्थान को ले जाता है। अब शुरू होता है राजा का राक्षस के विरुद्ध अभियान। राजा अपार कष्टों को झेलता हुआ उस अज्ञात स्थान पर पहुँच जाता है, जहाँ राक्षस ने रानी को बन्दी बनाकर रखा है। अन्त में राजा और राक्षस के बीच भीषण युद्ध होता है जिसमें राजा विजयी होता है और अपनी रानी को वापस लाता है। लेकिन वास्तविक जीवन काल्पनिक जीवन से बिल्कुल अलग होता है। वास्तविक जीवन में हमें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिनसे पार पाना असंभव तो नहीं लेकिन कठिन अवश्य है।
मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है। उसमें अनेक प्रकार की अच्छाएँ लालसाएँ उठती रहती है जिनका कोई अन्त नहीं है- व्यक्ति की एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरी का जन्म हो जाता है और इसी प्रकार इच्छाओं का अंतहीन सिलसिला निरन्तर जारी रहता है। धन के बारे में तो यह बात और भी ठीक बैठती है क्योंकि आज लोग अधिक से अधिक धन संग्रह की अंधी दौड़ में शामिल होते जा रहे हैं। प्रदर्शन की लालसा इच्छाओं की अनंतता गला-काट प्रतियोगिता, ईर्ष्या की भावना आदि दुर्गुणों ने मनुष्य के जीवन का सुख-चैन छीन लिया है। अधिकाधिक धन कमाने के फेर में मनुष्य नैतिक मूल्यों को तिलांजलि देकर बेईमानी रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार तथा अन्य अपराध करके भी धनी बनने का स्वप्न देखता है। धन के इस लालच में मानव को दानव बना दिया है। आए दिन होने अपराधों के पीछे भी कहीं न कहीं शीघ्र धन पाने की लालसा अवश्य विद्यमान रहती है। और अधिक कुछ और अधिक की मृग-तृष्णा में वह जीवन भर भटकता फिरता है।
हमारी संस्कृति में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं और इन्द्रियों को वश में नहीं रखता वह जीवन भर अपने आप से असंतुष्ट रहकर अंतर्द्वन्द्व तथा अशांति का जीवन व्यतीत करता है। यह अक्षरशः सत्य है कि धन से मनुष्य कभी तृप्त नहीं हो सकता। आज जीवन के हर क्षेत्र में जिस प्रकार की अआपाधापी मची हुई है जिस पर का असंतोष व्याप्त है, उसके मूल में भी इच्छाओं, लालसाओं और स्वार्थों का विस्तार ही है। आज संसार में जहाँ कहीं भी अशांति, विद्वेष, लड़ाई-झगड़े शत्रुता कटुता वैमनस्य अथवा युद्ध का वातावरण है, उसके पीछे भी सबल राष्ट्रों की धन की लालसा है।
इसका अर्थ कदापि नहीं की व्यक्ति की असली और अकर्मण्य बनाकर बैठ जाना चाहिए तथा जो कुछ भाग्य में है उसी से संतोष कर लेना चाहिए। जीवन में उन्नति कर ने के लिए पुरुषार्थ करना आवश्यक है। जो व्यक्ति भाग्यवादी बनाकर पुरुषार्थ का त्याग कर देता है वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं है। हाँ, जब व्यक्ति धन-दौलत के पीछ पागलों की भाँति भागता है तथा किसी भी प्रकार से अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं रहता भर धन के इस चक्रवात से निकल नहीं पाता और जीवन के वास्तविक सुखों से वंचित रह जाता है।

  1. काल्पनिक कहनायों का राक्षस रानी का अपहरण क्यों करता है ?
    1. क्योंकि रानी अत्यंत बुद्धिमान थी
    2. क्योंकि रानी अत्यंत घमंडी थी
    3. क्योंकि वह राजा की पत्नी थी
    4. क्योंकि वह अत्यंत सुंदर थी
    5. क्योंकि रानी अत्यंत डरपोक थी
सही विकल्प: D

NA



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