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Direction: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 259 से 263 तक के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए।

कुछ महापुरुष तटस्थ होकर चिंतन करते हैं और अब अन्वीक्षण, चिंतन, मनन, विश्लेषण, संश्लेषण आदि के आधार पर नई व्यवस्था की कल्पना करते हैं तथा नए मूल्यों, नए आदर्शों तथा नई अवस्थाओं का सृजन करते हैं। नई व्यवस्था देने वाले ऐसे तटस्थ चिंतक धन्य होते हैं क्योंकि केवल आलोचना करते रहना तो सरल है किन्तु उपाय बताना कठिन है। मार्क्स ने कुछ उपाय बताए और लेनिन ने उन्हें मूर्त रूप दिया। रूसो, लास्की आदि ने भी उपाय बताए। उन्हें साकार करना अन्य जन पर निर्भर रह। किन्तु कुछ महापुरुष और भी आगे बढ़ गए। उन्होंने केवल उपाय नहीं बताया बल्कि स्वयं एकनिष्ठा से उस पर आचरण करने के लिए जुट गए। महात्मा गांधी ने जो समझा वही कहा, और जो कहा वही किया। उनके विचार, कथनी और करनी एक ही थे। उनमें अपनी बात कहने और आचरण करने का साहस था। उनका जीवन अपने सुझाव हुए उपायों एवं आदर्शों के आधार पर विहित प्रयोगों और अनुभवों की सजीव श्रृंखला है। महात्मा गांधी काल के प्रवाह के साथ नहीं बहे। वे युग प्रवर्तक हो गए। गांधी महान और अलौकिक पुरुष थे।

  1. इस गद्यांश में लेखक ने मुख्य रूप से क्या वर्णित किया है ?
    1. कुछ महापुरुषों का चरित्र चित्रण किया है।
    2. मार्क्स के सिद्धांतों की व्याख्या की है।
    3. मात्र महात्मा गाँधी के चरित्र की विशिष्टता का कारण बताया है।
    4. महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का महत्व मात्र समझाया है।
सही विकल्प: A

इस गद्यांश में लेखक ने मुख्य रूप से कुछ महापुरुषों का चरित्र चित्रण किया है।



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