Direction: निम्नलिखित आवरण को पढ़कर सम्बद्ध वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर का चयन कर उसे चिन्हित करें।
हम सब लोग एक भीड़ से गुजर रहे हैं। जो सवेरे घर से निकल कर दफ्तर और वापस घर जाकर अपना दिन सार्थक करते हैं, उन्हें भीड़ में सिर्फ बस में साक्षात्कार होते हैं। जो मोटर से चलते हैं उनके लिए भीड़ एक अवरोध है जिसे वे लोग सशक्त और फुर्तीला सवारी गाड़ी से पार कर जाते हैं। जो पैदल चलते हैं वह खुद भीड़ है। लेकिन यह तीनों वास्तव में न तो भीड़ से कुछ समय के लिए निपट कर बाकी समय मुक्त है न अलग-अलग रास्तों के कारण भीड़ के अंदर कम या ज्यादा फँसे हुए हैं। ये सब बिल्कुल एक ही तरह से और हर समय पूरी तौर से भीड़ में फँस चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ये जानते नहीं और यह तो बिल्कुल नहीं जानते कि जिनके पास सत्ता है वह राज्य की हो या संगठित उद्योग कि, वह भीड़ का इस्तेमाल भीड़ में फँसे प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध करता है। जान भी ले तो सिर्फ इतना जानते हैं कि हम इस संसार के नहीं रह गए हैं और हमारे चारों तरफ जीवन नहीं बल्कि भीड़ है जो अपनी शक्ल भीड़ के पर्दे पर नहीं देख सकते। अगर किसी को यह शक्ल दिखाई देने लगे तो उसे मालूम होता है कि अब वह जिस भीड़ को पहचानता है वह अभी तक उसके विरुद्ध इस्तेमाल की जा रही है। अपनी शक्ल का यह परिचय कवि के लिए, जो एक भीड़ से अन्य सामान्य जनों की अपेक्षा अधिक गहरा भाषाई संबंध रखता है, एक मुक्त कर देने वाला अनुभव बन जाता है। उसका विपर्यय भी सही है कि जब तक उसे अपनी शक्ल नहीं दिखाई देती, वह फँसा रहता है।
-
उपर्युक्त गद्यांश का सही शीर्षक है ?
-
- भीड़ में कवि
- भीड़ का इस्तेमाल
- भीड़ में फँसे लोग
- भीड़ की शक्ल
- भीड़ में कवि
सही विकल्प: C
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है- ' भीड़ में फँसे लोग। '